दुन्या की मुहब्बत सबसे बडा गुनाह
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*🥀 दुन्या की मुहब्बत सबसे बडा गुनाह 🥀*
✏️अल्लाह तआला ने हजरते मूसा अलैहिस्सलाम की तरह वह्य की: ऐ मुसा! दुनिया की मुहब्बत में मशगूल न होना, मेरी बरगाह में इस से बडा कोई गुनाह नही हैं।
रिवायत है कि हजरते मूसा अलैहिस्सलाम एक रोते हुवे शख्स के पास से गुजरे, जब आप वापस हुवे तो वोह शख्स वैसे ही रो रहा था, मूसा अलैहिस्सलाम ने बारी तआला से अर्ज किया: या अल्लाह !
तेरा बन्दा तेरे खौफ से रो रहा है, अल्लाह तआला ने फरमाया: मूसा ! अगर आंसू के रास्ते इस का दिमाग बाहर निकल आए और इस के उठे हुए हाथ टूट जाए तब भी मैं इसे नही बख्शूंगा कि यह दुनिया से मुहब्बत रखता है।
*हजरते अली रदियल्लाहु तआला अन्हु का कौल है कि जिस शख्स में से छे आदते पाई जाती है, वह नारे जहन्नम से दुर और जन्नत का मतलूब है:*
1. अल्लाह को पहचान कर उसकी इबादत की।
2. शैतान को पहचान कर उस की मुखालफत की।
3. हक को पहचान कर उस की इत्तिबाअ की।
4. बातिल को पहचान कर उस से इजतिनाब किया।
5. दुन्या को पहचान कर उसे तर्क कर दिया और
6. आखिरत को पहचान कर उस का तलबगार रहा।
*[📚मुकाशफ़तुल क़ुलूब सफा 221]*
*👉 अल्लाह पाक हम सबको नेक राह पर चलने की तौफीक अता फरमाए आमीन*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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