संदेश

दिसंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हजरत आदम अलैहीस्सलाम और शैतान

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 हजरत आदम अलैहीस्सलाम और शैतान 🥀*              ✏️ हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और शैतान अल्लाह पाक ने फ़रिश्तों में जब एलान फ़रमाया कि मैं ज़मीन पर अपना एक ख़लीफ़ा बनाने वाला हूं तो शैतान ने इसका बहुत बुरा माना। अपने दिल ही दिल में हसद की आग में जलने लगा। चुनांचे जब खुदा ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा फ़रमाकर फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि मेरे खलीफ़ा के आगे सज्दे में झुक जाओ तो सब सज्दे में झुक गये। मगर शैतान अकड़ा रहा और न झुका। अल्लाह पाक को उसका यह तकब्बुर पसंद न आया उससे फ़रमाया कि ऐ इबलीस । मैंने जब अपने दस्ते कुदरत से बनाए हुए ख़लीफ़ा के आगे सज्दा करने का हुक्म दिया तो तुमने क्यों न सज्दा किया शैतान ने जवाब दिया मैं आदम से अच्छा हूं। इसलिए कि मैं आग से बना हूं और वह मिट्टी से बना है। फिर मैं एक बशर को सज्दा क्यों करता खुदा तआला ने इसका यह तकब्बुर भरा जवाब सुना तो फरमाया मरदूद निकल जा मेरी बारगाहे रहमत से जा तू क़्यामत तक के लिए मरदूद व मलऊन है  *(📚सच्ची हिकायत हिस्सा,1सपह,63)* *सबक ::* खुदा के रसूल और उसके मकबूल की इज्ज़त व ...

गांव मे दीन की तब्लीग करने पहुंचे देवभंगी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 गांव मे दीन की तब्लीग करने पहुंचे देवभंगी 🥀*   ✏️ बहुत तेज़ धूप मे एक जमात वालें गांव मे दीन की तब्लीग करने पहुचें___________________________________________ कुछ लोगो को इकट्ठा किया,,उन लोगो ने देखां कि ये जमात वाले काफ़ी परहेज़गार है_____________________________ गांव वालों से उन्होने कहा नमाज़ के पाबन्द बनों_______________________________ रोज़ें रखों________________________________________ अल्लाह का ज़िक्र-ए-ख़ैर करों__________________________ अल्लाह के सिवा किसी से ना मांगों_____________________ गैरुल्लाह से मदद मांगना शिर्क है_______________________ सिर्फ़ अल्लाह से मांगों_______________________________ ईतने मे एक मौलवी साहब को प्यास लग गई तो उन्होने एक आदमी से पानी लाने को कहा तो उस आदमी ने कहा आपने शिर्क कर दिया____________________________________ मौलवी ने पूछा क्यों तो उस आदमी ने कहा कि अभी अभी आपने ही तो कहा है की गैरुल्लाह से मदद मांगना शिर्क है तो आपने हमसे मदद क्यो मांगी तो मौलवी ने कहा कि हमने तुमको ख़ुदा समझकर मदद नही मांगी______________________________...

क्या वाकई ज़िना कर्ज़ है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 क्या वाकई ज़िना कर्ज़ है 🥀* ✏️ जी हाँ ज़िना एक कर्ज़ है और ये ज़िना की तमाम तबाहीयो और बर्बादियों मे से वोह तबाही व बर्बादी है जिसका ज़िनाखोर खुद दुनिया मे ही शिकार होता है और ये जिनाखोर के लिए उसके मुंह पर जबरदस्त तमाचा होता है और बुजुर्गों ने ज़िना के बारे मे फरमाया है कि  *ज़िना वोह कर्ज़ है जो जिनाखोर के घर वाले चुकायेगे* शम्सुद्दीन मोहम्मद बिन अहमद हम्बली رحمة الله عليه​ ने लिखा है कि : *" जो किसी से दो हजार दिरहम के बदले जिना करेगा तो उसके घरवालों मे से चौथाई दिरहम के बदले ज़िना कीया जायेगा बेशक ज़िना एक कर्ज़ है अगर तु इसे कर्ज़ लेगा तो जान ले कि इसकी अदायगी तेरे घरवाले करेंगे-"* 📚( गेजाउल अलबाब जिल्द 2 सफा 440 मिश्र ) *ज़िना एक कर्ज़ है* इसकी तस्दीक़ इस हदीस शरीफ से भी होती है जिस मे हुज़ूर ﷺ ने फरमाया है कि : *जिसने ज़िना कीया तो उसके साथ भी ज़िना कीया जायेगा* 📚( कन्ज़ुल उम्माल जिल्द 5 सफा 456 बैरुत ) *ज़िना का दुनिया में बदला* ज़िना की तरफ ले जाने वाले काम जयसे गैर औरत को छुना,गैर औरत की तरफ शहवत से देखना,बोसा लेना,गपशप करना,दोस्तीया करना...

मुस्लिम लड़कियों का गैरों के साथ मोहब्बत के रिश्ते की रोकथाम कैसे हो

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुस्लिम लड़कियों का गैरों के साथ मोहब्बत के रिश्ते की रोकथाम कैसे हो 🥀* ✏️ यह सिलसिला दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है कि आज के इस पुरफितन दौर में मुसलमानों की लड़कियां गैर मुस्लिम के साथ मोहब्बत का रिश्ता बढ़ा रही हैं. *इसकी कुछ वजुहात नीचे दि हुई हैं* :- 1)अपने बच्चों की गैर इस्लामी तरीके से परवरीश करना. 2) इनको हमारी तहज़ीब शरम व हया नहीं सिखाना 3) इस्लाम की दिनी तालीम बिल्कुल नहीं देना सिर्फ दुनियावी तालीम देना जिस से दुसरे मज़हबों की मालुमात होती हैं और इस को अच्छा समझने लगते हैं 4) अपने बच्चों को बहुत लाड प्यार देना हर ख्वाईश पुरी करना इन्हें बहुत महंगे महंगे मोबाइल बगैर शर्त के देना 6) इन्हें बगैर देखरेख के दुर दुसरे शहरों के कालेज में भेजना या इन्हें वह तालीम जहाँ लड़का लड़की एक साथ पढ़ते हैं ऐसे काॅलेजों में भेजना 7) बेटी की शादी में बिला वजह देरी करना 8) बेटी के दोस्त की मालुमात नहीं करना के वह कहां जा रही है किससे मिल रही है 9) अपनी जवान बेटी पर बहुत ज्यादा विश्वास करना के वह ऐसा नहीं करेगी. याद रखें जिन्होंने किया वह भी मां बाप के भरोसेमंद बच्चे थे. 10) क...

आज रात मेरी चारपाई भी सूनी ना होती

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 आज रात मेरी चारपाई भी सूनी ना होती 🥀* ✏️ *एक रात हज़रते उमर फ़ारूक़ मदीने की गलियों का चक्कर लगा रहे थे जैसा कि आप अक्सर रात को गश्त करते थे।* *एक दफ़ा आप एक औरत के दरवाज़े से गुज़रे जो दरवाज़ा बंद किये अंदर कुछ अशआर पढ़ रही थी जिन का मफ़हूम कुछ यूँ है :* "ये रात तवील हो चुकी है और इस के सितारे अपनी बुलंदी को पहुँच चुके हैं और मुझे इस बात ने बेदार कर रखा है कि दिल बहलाने के लिये मेरा दोस्त नहीं, अल्लाह की क़सम, अगर उस की ज़ात ना होती तो इस चारपाई से इसके पहलू हरकत करते, मै रात गुज़ारती ग़फ़लत में, ना ताज्जुब करती और ना किसी पे लानत करने वाली होती, बातिन लतीफ़ होता और बिस्तर उसको ना घेरता, वो मुझसे मुख्तलफ़ अंदाज़ में दिल्लगी करता गोया रात की तारीकी में उस का अबरू चाँद की तरह ज़ाहिर हुआ, इसे खुश करता जो उसके क़रीब खेलता, वो मुझे अपनी मुहब्बत में इताब (शिद्दत से मुहब्बत) करता और मै उसे इनाब करती लेकिन मै रक़ीब और निगरान से डरती हूँ जो हमारे नफ्सों की निगरानी करता है, जिसका कातिब कभी सुस्त नहीं होता और कभी उस से कोताही नहीं होती।" *📚 (تفسیر در منثور، ج1، ص703، ملخصاً)* ✏️...

राबिया बसरी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴             *🥀 राबिया बसरी 🥀*  ✏️ *हज़रत राबिर बसरी*  *के वालिद माजिद एक गरीब शख्स थे। उनकी तीन बेटियाँ और भी थीं। और हज़रत राबिया बसरी चौथी बेटी थीं और उनको राबिया इसलिए कहते हैं के राबिया का मानी चौथी औरत के हैं।* *जिस रात हज़रत राबिया पैदा हुई उसी रात उनके वालिद के घर में खर्च करने को कुछ ना था वो उसी फिक्र में सो गए के रात को हुज़ूर सरवरे आलम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम की ख़्वाब में ज़ियारत हुई और हुज़र ने फ़रमाया तुम गमगीन मत हो ये लड़की जो तुम्हारे हाँ पैदा हुई है बड़ी बरगजीदा और मक़बूल होगी। तुम सुबह अमीर बसरा के पास जाओ एक कागज़ पर मेरी तरफ से ये लिखकर उसे पहुँचा दो के हर रात तुम जो मुझ हुजूर ﷺ*  *पर सौ बार दुरूद भेजते हो और जुमअे की रात को चार सौ बार, ये जुमए की रात जो गुज़र गई है तुम उसमें दरूद पढ़ना भूल गए हो। उसके एवज़ में चार सौ दीनार बतौर कुफ्फारा इस शख्स को दे दो।* *हज़रत राबिया के वालिद जब बैदार हुए तो रोते हुए उठे और हस्ब-उल-इर्शाद एक अर्जी लिखी। और अमीर बसरा के पास पहुँचे और एक दरबान के हाथ वो अर्जी ...

इस्लाम में पूरे तौर पर दाखिल हो जाओ

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 इस्लाम में पूरे तौर पर दाखिल हो जाओ 🥀*   ✏️ इस वक़्त उममते मुस्लिमा जिन चीजों से गुज़र रही है वो बयान करने के काबिल नहीं है हर शख्स को अपनी जिम्मेदारी खूब अच्छे तरीके से निभानी चाहिए और उस का हल तलाश करना चाहिए के वो कौन सी गलतियां और खामियां हैं के जिन की वजह से आज इन आज़माइश मे मुबतिला हैं और एक बात याद रखें जब तक हम अल्लाह रब्बुल इज्ज़त की रहमत को नेमत नहीं समझेंगे तब तक हम अल्लाह रब्बुल इज्ज़त को असल मुनइम नहीं समझेंगे।  ✏️ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने हमे दो तरह की नेमतें अता फरमाई हैं एक तो है ज़ाहिरी नेमत जैसे खाना पीना दौलत मालदारी और बहुत सी चीजें और दूसरी और सब से बड़ी नेमत ईमान की नेमत है इस से बड़ी कोई नेमत नहीं हो सकती अल्लाह रब्बुल इज़त का हम पर बहुत बड़ा फ़ज़ल व अहसान है कि उस ने हम सब को एक अज़ीम नेमत अता फरमाई और वो ईमान है और ये इतनी बड़ी नेमत है कि इसका शुक्र भी अदा नही कर सकते और इस बात का हम तसववुर भी नही कर सकते कि वो कितनी बड़ी नेमत है लेकिन कुछ लोग इस नेमते अज़ीमा को नेमत नही समझते हैं और पूरे तौर पर इस्लाम के अहकामात पर अमल नही करत...

हिन्दू लड़के लड़की से निक़ाह नहीं

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 हिन्दू लड़के लड़की से निक़ाह नहीं 🥀*  ✏️ यक़ीनन ज़िना गुनाहे अजीम (बडा) और बहुत बड़ी बला है! यह इन्सान की दुनिया और आखिरत को तबाह व बर्बाद कर देता है! वह नौजवान लड़कियाँ और लड़के जो हिन्दू की लड़कियों से लड़कों से नाज़ाइज़ ताल्लुक़ात रखते/ रखती है! और यह समझते है के यह कोई गुनाह नही इसलिये के वह हिन्दू है! यह सख़्त जेहालत है! हिन्दू लड़की लड़के से मुबाशरत सोहबत भी ज़िना ही कहलाएगी!  👥इसी तरह काफीर, (नास्तीक)मजुसी, बुत परस्त, सितारा परस्त, उन से निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना मे ही शुमार होंगा! जिना किसे कहते है निचे दर्ज़ तहरीर में मुलाहिजा फ़रमाये 🚻कोई भी मर्द (Male)किसी भी ऐसी औरत से सोहबत *संभोग* करे जिसका वह मालिक नही, (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) या कोई भी औरत (Female)किसी ऐसे मर्द से मुबाशरत करे जीस की वह जौजीयत मे ना हो (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) उसे ज़िना कहते है। जिना करने वाले मर्द को जिनाकार कहते है! और जिना करने वाली औरत को जानीयॉ कहते है! चाहे मर्द और औरत दोनो राज़ी हो! चाहे इस मे (नाजाइज जिस्मानी रिश्ता बनान...

कादियानी की शरारत या मुसलमानो का जज़्बातीपन

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 कादियानी की शरारत या मुसलमानो का जज़्बातीपन 🥀* _✏️ आज कल एक वीडियो बोहोत वाइरल हो रही हे जिसमे देखाया गया हे के google पर ,लिखो के मुसलमानों का खलीफा कोन हे तो कादयानियों के मौजूदा मलऊन खलीफा का नाम आता हे,जिसको देख कर फ़ितरी तोर पे मुसलमानो के जज़्बात भड़क उठते हे ,_ *कुछ दोस्तों ने गूगल को फीडबैक देने की मुहिम सुरु की हुई हे ओर सब को भी कह रहे हे के पहले सर्च करो और फिर फीडबैक दो* _में इतना अर्ज़ करना चाहता हु के गूगल पर सर्च करने और रिज़ल्ट क्लीक करने से वो रिज़ल्ट्स टॉप पे आजाता हे और सर्च बढ़ते रहते हे जिस की वजह से वो रिजल्ट लाखो फीडबैक के बाद डिलीट नही किया जा सकता अब देखना ये हे के कहि हम मुसलमान जज़्बात में आकर कादियानियों को फायदा तो नही पोहचा रहे हे_ *ओर दूसरी अहम बात पूरी दुनिया मे इस वक़्त खिलाफत मोकुफ हे और जब खिलाफत मौजूद ना हो तो कोई खलीफा कैसे हो सकता हे, ओर हर वो शख्स जिसे ये मालूम हे के खिलाफत किया होती हे इसे खिलाफत के मोकुफ होने का भी इल्म हे , आलम ये हे दुनिया तो दूर किसी एक मुसलमान मुल्क़ में मुत्फ़क़्क़ा खलीफा नही हे ,अगर आज मुसलमानो का खलीफा होता त...

औरत को एक वक्त में एक शादी का ह़ुक्म क्यों दिया गया

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 औरत को एक वक्त में एक शादी का ह़ुक्म क्यों दिया गया 🥀* *_✏️साइंस भी इस्लाम के क़ानून की हिमायत करने पर मजबूर हो गया!!_* *एक माहिर डाक्टर जुनैन यहूदी (जो दीनी आ़लिम भी था) खुले आम कहता है कि पूरी ज़मीन पर मुस्लिम औ़रत से ज़्यादा पाकसाज़ औ़रत और साफ़ सुथरी किसी भी मज़हब की औ़रत नही है।* *पूरा वाक़िआ़ इस त़रह है कि अलबर्ट आंइसटाइन इंस्टीटयूट से त‌अ़ल्लुक़ रखने वाला एक माहिर जुनेन यहूदी आ़लिम राबर्ट ने अपने इस्लाम क़ुबूल करने का एलान किया जिसकी एकमात्र वजह बना क़ुर‌आन में तलाक़शुदा औ़रत की इ़द्दत के लिए तीन महीने के ह़ुक्म में छुपी हुयी ह़िकमत के राज़ को जानना।* *सूरह़ बक़रह आयत नं 228 में अल्लाह का फ़रमान है कि तलाक़शुदा औरत अपने आपको तीन ह़ैज़ (पीरियड) तक रोके रखे।* *इस आयत ने एक हैरत‌ अंगेज़ नये इ़ल्म डीएन‌ए के रास्तों को खोला और पता चला कि मर्द की मनी (Sprum) में प्रोटीन दूसरे मर्द के मुक़ाबले में 62 फीस़दी अलग अलग होते हैं और औ़रत का जिस्म एक कम्पयूटर की तरह है जब कोई मर्द हमबिस्तरी (Sex) करता है तो औरत का जिस्म मर्द के तमाम वैक्टीरिया अपने अंदर महफ़ूज़ कर ले...

अल्लाह इल्म को किस तरह खत्म करेगा

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 अल्लाह इल्म को किस तरह खत्म करेगा 🥀* ✏️ क़यामत की निशानियों में से एक निशानी - "अल्लाह इल्म को उठा लेगा, इल्म ए दीन ख़त्म हो जायेगा".  अल्लाह आलिमों का साया हमारे सर से उठा लेगा, फिर लोग जाहिलों को सरदार बना लेंगे, लोग जाहिल सरदारों से सवाल करेंगे ! और वो जाहिल सरदार अपने कम इल्म के जरिये लोगों को गुमराह करेंगे ! वो दौर शुरू हो चुका है भाइयों, ये आज के "इंजीनियर अली मिर्ज़ा, प्रोफेसर घामदी वक़्त के जाहिल सरदार हैं ! और इनसे इल्म ए दीन का सवाल करना जहालत की निशानी है ! इंजीनियर अली मिर्ज़ा कहता है - खड़े होकर पेशाब करना हर सूरत में जायज़ है ! प्रोफेसर घामदी कहता है - दाढ़ी रखना सुन्नत नहीं है, म्यूजिक हराम नहीं है वगैरह वगैरह...  इन जाहिल सरदारों से बचो और आलिमों से अपना ताल्लुक जोड़ों... इमाम मेहदी जब तशरीफ़ लाएंगे तो वक़्त के जाहिल सरदार और उनके मानने वाले उनको नहीं पहचानेंगे बल्कि इल्म ए दीन रखने वाले (आलिम) उनको पहचानेगें, अगर हमने आलिमों से ताल्लुक तोड़कर जाहिलों से ताल्लुक जोड़ा तो हम मेहदी का इंकार करने वालों में शामिल होंगे....  इसलिए उलमा ए इकराम से ...

आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रदिअल्लाहु तआला अन्हु पर पीएचडी (PHD) करने वाले कुछ लोगों के नाम

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रदिअल्लाहु तआला अन्हु पर पीएचडी (PHD) करने वाले कुछ लोगों के नाम 🥀* ✏️ 1-डॉ हसन रज़ा खां -फ़क़ीह ए इस्लाम (पटना विवि -1978) 2-डॉ ऊषा दयाल -बरेलवी तहरीक (कोलंबिया विवि, न्यूयॉर्क -1990) 3-डॉ सय्यद जमीलउद्दीन रज़वी -आला हज़रत की नातिया शायरी (डॉ हरिसिंह गौड़ विवि मध्यप्रदेश -1992) 4-डॉ मुहम्मद इमामुद्दीन -आला हज़रत की नातिया शायरी (बिहार विवि मुज़फ़्फ़रपुर-1992) 5-डॉ तय्यब अली रज़ा अंसारी - हयात और कारनामे (हिन्दू विवि बनारस-1993) 6-डॉ मजीदुल्लाह क़ादरी -कंज़ुल ईमान (कराची विवि पाकिस्तान-1993) 7-डॉ अब्दुल बारी सिद्दीकी- आला हज़रत के कारनामे(सिंध विवि पाकिस्तान-1993) 8-डॉ अब्दुल नईम अज़ीज़ी -आला हजरत की शायरी ( रुहेलखंड विवि बरेली -1994) 9-डॉ सिरात अहमद बस्तवी -आला हज़रत की नातिया शायरी (कानपुर विवि -1995) 10- डॉ अमजद रज़ा क़ादरी - आला हज़रत की फ़िक्री तनक़ीदें (वीर कुँवर सिंह विवि भोजपुर-1998 11-डॉ अनवर खां -आला हज़रत की फ़िक्री ख़िदमात (सिंध विवि पाकिस्तान-1998) 12-डॉ गुलाम मुस्तफा नजमुल क़ादरी -आला हज़रत का तसव्वुर ए इश्क़(मैसूर विवि कर्नाटक -2002) 13-डॉ रज़ाउर...

आख़िर ग़लती हो कहाँ रही है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 आख़िर ग़लती हो कहाँ रही है 🥀* *✏️ अगर पानी का नल चालू हो और उसके नीचे कितना भी बड़ा बर्तन रखा हो वो कभी न कभी ज़रूर भर जाता है और अगर नही भरता तो समझ लीजिए कि बर्तन में छेद हो गया है जो बर्तन को भरने नही दे रहा, उसके लिए दो तरीक़े हैं या तो बर्तन को बदल दो या फिर उसका छेद बंद कर दो।* *अगर आप ग़ौर करेंगें तो इस्लामी क़ानून के हिसाब से हर साल हज़ारों करोड़ रुपए गरीबों के लिए सदक़ा ज़कात के नाम पर निकलता है।* *अब सवाल ये पैदा हो रहा है कि हर साल हज़ारों करोड़ रुपए अगर ग़रीबों के लिए जा रहा हैं तो फिर मुसलमानों के अंदर से ग़रीबी खत्म क्यों नही हो रही? आज भी सबसे ज़्यादा भिखारी इसी क़ौम से आते हैं और अगर ये पैसा दीनी तालीम पर ख़र्च हो रहा है तो तक़रीबन 95% मुसलमानों को दीनी तालीम में क़ाबिल हो जाना चाहिए था।* *जबकि हकीकत ये है कि दीनी तालीम तो छोड़ो बहुत बड़ी तादाद में मुसलमानों को क़ुरान शरीफ़ पढ़ना भी नहीं आता, तो आख़िर ये पैसा जाता कहां है?* *आख़िर छेद कहां पर है कि ना तो ग़रीबी ख़त्म हो रही है और ना ही जिहालत।* *जब तक इस छेद को ढूंढ कर इसे बंद नही किया जाएगा तब...

तीजे के चनों का मसअला

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 तीजे के चनों का मसअला 🥀* ✏️ आज कल लोग बहस भी उन बातों पर करते है जिनका ना तो आपसे सवाल होगा ना ही फ़र्ज़ वाजिब का मसला है लेकिन बहस इतनी शदीद करेंगे मानो के ये मसला फ़र्ज़ वाजिब है.... न्याज व फातिहा तीजे दसवीं,चालीसवीं,और तबारक वगैरा यह सब सिर्फ जाइज़ अच्छे और मुस्तहब काम हैं न शरअन फ़र्ज़ हैं न वाजिब न सुन्नत कोई न करे तब भी कोई हर्ज व गुनाह नहीं लेकिन आज कल उन कामों को इतना ज़रूरी समझ लिया गया है कि गरीब से गरीब आदमी के लिए भी उन का करना इतना ज़रूरी हो गया है कि ख्वाह कही से करे कैसे ही करे उधार कर्ज़ लेकर मगर करे ज़रूर यह सुन्नियत के नाम पर ज़्यादती हो रही है। हक यह है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम और आप के सहाबा व ताबेईन के ज़माने में मय्यत को सवाब पहुँचाते और उसकी मगफिरत की दुआ के लिए सिर्फ जनाज़े की नमाज़ होती थी और किसी चीज़ का रिवाज़ न था यह सब काम बहुत बाद में राइज हुये कुछ मौलवियों ने उन्हें एक दम नाजाइज़ व हराम कह दिया सिर्फ इसलिए कि यह सब नये काम है। लेकिन उलमा-ए-अहले हक अहले सुन्नत वलजमाअत ने फरमाया कि यह सब काम अगचें नये हैं मगर अच्छे हैं बुरे नहीं ...

ज़ुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए इस्लाम ने क्या तरीक़ा बताया है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴  *🥀 ज़ुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए इस्लाम ने क्या तरीक़ा बताया है 🥀* ✏️ बेच कर तलवारे खरीद लिए मुसल्ले हमने। बेटियां लुटती रही और हम सजदे करते रहे।" जब भी आलिम बयान देते है। मुसलमानो पर हो रहे ज़ुल्म के बारे में पूछो तो एक ही जवाब देते है। ये सब हमारे आमाल की सजा है।नमाज़ पढ़ो और रोज़े रखो। पर कभी ये नहीं बताते के इस जब हम नमाज़ के बाद रोज़ी में  *बरकत की दुआ करते है*  तो क्या आसमान से नोटों की बारिश शुरू हो जाती है ? नहीं हमे *दुआ के बाद दुकान, ऑफिस, नौकरी या कारखाने जाकर रोज़ी में बरकत के लिए मेहनत करनी पड़ती है*। तब जाकर हमे रोज़ी मिलती है। इसी तरह ज़ुल्म के खात्मे के लिए दोनों काम ज़रूरी है नमाज़, रोज़ा और ज़ालिम का मुकाबला  अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने फरमाया "उंट को बांधो और अल्लाह पर तवक्कल करो।"उंट को खुला छोड़कर अल्लाह पर तवक्कल करने को नहीं कहा  *नमाज़ ज़रूर पढ़ना है लेकिन ज़ालिम के खिलाफ कोशिश भी जरूरी है क्यों के नमाज़ तो जंग में भी पढ़नी है।*  *अगर मूसल्ले पर ही सारे मसले हल हो जाते तो अल्लाह के रसूल और सहाबा कभ...

रसूल अल्लाह ‎ﷺ ‏कुल कितने जुमुए अदा फ़रमाए

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 रसूल अल्लाह ﷺ कुल कितने जुमुए अदा फ़रमाए 🥀*  ✏️ मुफस्सिरे शहीर हकीमुल उम्मत हज़रते मुफ्ती अहमद यार खान रहमतुल्लाहि तआला अलैह फ़रमाते हैं  ▪️रसूलरूलाह ﷺ ने तकरीबन 500 पांच सो जुमुए पढ़े हैं  इस लिये कि जुमुआ बादे हिजरत शुरू हुवा जिस के बाद दस साल आप ﷺ की ज़ाहिरी ज़िन्दगी शरीफ़ रही इस अर्सें में जुमुए इतने ही होते हैं  *📚 मिरआत जिल्द 2 सफ़ह 346* *▶️ 3 तीन जुमुए सुस्ती से छोड़े उस के दिल पर मोहर*  ▶️ रसूलरूलाह ﷺ का फ़रमाने इब्रत निशान है  जो शख़्स 3तीन जुमुआ  (की नमाज़) सुस्ती के सबब छोड़े अल्लाह उस के दिल पर मोहर कर देगा ▪️जुमुआ फ़र्जे ऐन है और इस की फ़र्जिय्यत जोहर से ज़ियादा मुअक्कद (यानी ताकीदी) है और इस का मुन्किर  (यानी इन्कार करने वाला) काफ़िर है *📚 बहारे शरीअत जिल्द 1 सफ़ह 762* *▶️ जुमुआ के इमामा की फ़ज़ीलत* 👉 रसूलरूलाह ﷺ का इर्शादे रहमत बुन्याद है बेशक अल्लाह तआला और उस के फ़िरिश्ते जुमुआ के दिन इमामा बांधने वालों पर दुरूद भेजते हैं 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

अल्लामा इकबाल ने तकरीबन 80 साल पहले लीखी ये बात कितनी सच है

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 अल्लामा इकबाल ने तकरीबन 80 साल पहले लीखी ये बात कितनी सच है 🥀* ✏️ *कल मज़हब पूछकर जिसने बख्श दी थी जान मेरी...* *आज फिरका पूछकर उसने ही ले ली जान मेरी!* *मत करो रफादेन पर इतनी बहस मुसलमानों...* *नमाज़ तो उनकी भी हो जाती है जिनके हाथ नही होते!* *तुम हाथ बाँधने और हाथ छोड़ने पर बहस में लगे हो...* *और दुश्मन तुम्हारे हाथ काटने की साजिश में लगे हैं!* *ज़िन्दगी के फरेब में हम ने हज़ारों सज्दे क़ज़ा कर डाले...* *हमारे जन्नत के सरदार ने तो तीरों की बरसात में भी नमाज़ क़ज़ा नही की!*  *सजदा-ए-इश्क़ हो तो "इबादत" मे "मज़ा" आता है...* *खाली "सजदों" में तो दुनियां ही बसा करती है!* *लोग कहते हैं के बस "फर्ज़" अदा करना है.....* *एैसा लगता है कोई "क़र्ज़" लिया हो रब से!* *तेरे "सजदे" कहीं तुझे "काफ़िर ना कर दें...* *तू झुकता कहीं और है और "सोचता" कहीं और है!* *कोई जन्नत का तालिब है तो कोई ग़म से परेशान है...* *"ज़रूरत" सज्दा करवाती है "इबादत" कौन करता है!* *क्या हुआ तेरे माथे पर है ...

स्ज़िद में लगा बोर्ड फलाँ फलाँ हमारी मस्ज़िद में न आए

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मस्ज़िद में लगा बोर्ड फलाँ फलाँ हमारी मस्ज़िद में न आए 🥀* ✏️ अक्सर देखा गया है की गैर अक़ीदे के लोग मुक़्तदी बन कर आते है,,हमारे अपने तरीके और अक़ाईद पे नामाज़ पढ़ने के लिये,,, पहले एक आएगा फ़िर दो तीन ऐसे रफ़्ता रफ़्ता तादाद बढ़ाते है,,ये लोग सबसे पहले मौज़ुद मुक़्तदी को पकड़ते है फ़िर उसके बाद इन्तेज़ामिया को पकड़ते है,,, फ़िर कोशिश कर के इमाम को मस्ज़िद से निकलवाते है,,या फिर कमेटी के मेम्बरों में फसाद पैदा करते है,, और जब इनकी पकड़ मजबूत हो जाती है तब मस्ज़िद में सलात् व सलाम,,दरूद व नमाज़ के तरीके वगैरह पे ऐतराज़ करते है,,ये वो ही लोग है जो शुरु में इसी तरीके से नमाज़ पढ्ने के लिये मस्ज़िद में आते है और फ़िर अचानक इनको तरीके तब्दीली चाहिए होती है,,, और फ़िर इस तरह से शुरु होती है इलाक़े मे मस्लकी जंग,,,, आप क्या चाहते हो जंग शुरु होनी चाहिए या फ़िर पहले ही उस जंग को रोक देना चाहिए ऐतराज़ किसी के मस्ज़िद पे आने से नहीं है बल्कि ऐतराज़ उस फ़साद से है जो ये फ़सादी चाहते है! लिहाज़ा मस्ज़िद में लगाये गए नोटिस बोर्ड को गलत तरीके से पेश न करे हालात ऐसे नहीं है की इख्तिलाफ़ को बढ़ाया जाए 👉 न...

शैतान का साथी

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 शैतान का साथी 🥀* ✏️ हज़रत हक़ीह अबुल्लैस समरकन्दी رحمة الله عليه फ़रमाते है : किसी ने शैतान से कहा में चाहता हु कि तेरी तरह बन जाऊं। शैतान ने कहा नमाज़ पढ़ना छोड़ दे और कभी सच्ची क़सम न खाना (तो बिलकुल मेरी तरह हो जाएगा) 📚नुज़हतुल मजलिस' 1/493) 📚नमाज़ की अहमियत' 31) ✏️ फुक़्हा - नमाज़ में सुस्ती करने वाले क़यामत के दिन सुअर की सूरत में उठेंगे| 📙क्या आप जानते हैं,सफह 439) फुक़्हा - जहन्नम में एक वादी है जिसका नाम वैल है उसकी गर्मी का ये हाल है कि उससे जहन्नम भी पनाह मांगता है उसमे बे नमाज़ी डाले जायेंगे| 📕पारा 30,सूरह माऊन,आयत 4) 📚बहारे शरीयत,हिस्सा 3,सफह 7) ➤फुक़्हा - जो नमाज़ों को उनके वक़्त पर पढ़े और उसके आदाब की हिफाज़त करे तो मौला पर अहद है कि उसको जन्नत में दाखिल करे और जिसने नमाज़ों को छोड़ा या पढ़ने में उसके आदाब व अरकान सही ना रखा तो उस पर कोई अहद नहीं चाहे तो उसे बख्शे और चाहे अज़ाब दे| 📗मज्मउज़ ज़वायेद,जिल्द 1,सफह 302) 👉 तो तौबा कीजिये और अपनी नमाज़ों को अदा करना शुरू कीजिये कि मौत का कोई भरोसा नहीं कि कब आ जाये। 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

दुन्या की मुहब्बत सबसे बडा गुनाह

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 दुन्या की मुहब्बत सबसे बडा गुनाह 🥀*                 ✏️अल्लाह तआला ने हजरते मूसा अलैहिस्सलाम की तरह वह्य की: ऐ मुसा! दुनिया की मुहब्बत में मशगूल न होना, मेरी बरगाह में इस से बडा कोई गुनाह नही हैं। रिवायत है कि हजरते मूसा अलैहिस्सलाम एक रोते हुवे शख्स के पास से गुजरे, जब आप वापस हुवे तो वोह शख्स वैसे ही रो रहा था, मूसा अलैहिस्सलाम ने बारी तआला से अर्ज किया: या अल्लाह !    तेरा बन्दा तेरे खौफ से रो रहा है, अल्लाह तआला ने फरमाया: मूसा ! अगर आंसू के रास्ते इस का दिमाग बाहर निकल आए और इस के उठे हुए हाथ टूट जाए तब भी मैं इसे नही बख्शूंगा कि यह दुनिया से मुहब्बत रखता है। *हजरते अली रदियल्लाहु तआला अन्हु का कौल है कि जिस शख्स में से छे आदते पाई जाती है, वह नारे जहन्नम से दुर और जन्नत का मतलूब है:*     1. अल्लाह को पहचान कर उसकी इबादत की।    2. शैतान को पहचान कर उस की मुखालफत की।    3. हक को पहचान कर उस की इत्तिबाअ की।    4. बातिल को पहचान कर उस से इजतिनाब किया।   ...

दीन ए इसलाम हर ज़माने में टेक्निकल (Technical) भी है और मॉडर्न (Modern) भी

 🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 दीन ए इसलाम हर ज़माने में टेक्निकल (Technical) भी है और मॉडर्न (Modern) भी 🥀* ✏️ मुस्लिम वालिदैन को चाहिए कि वो अपने बेटे बेटियों को स्कूल , कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़(School, College & Universities) भेजने से पहले उनको दीन ए इसलाम क्या है ये बतायें? दीन आसान है ये बतायें ? इस दीन को उन तक पहुंचाने में कितनी कुर्बानियां दी गई ये बतायें? अपने रसूलﷺ कि कुर्बानियों के बारे में बतायें। अगर ऐसा नहीं किया तो ये आपके बेटे बेटियां मग़रिबी तहज़ीब (Western Culture) के जाल में फंस जायेंगे और फसं रहे हैं इसलिए अभी भी वक़्त है लौट आओ अपने दीन की तरफ वरना जब जब दीन से दूरी हुई इज़्ज़तों के जनाज़े निकले हैं और निकल रहे हैं क्यूंकि जो कौम भी अपने रसूलﷺ की कुर्बानियों का एहसास नहीं करती , अपनी तारीख को भुला देती है , वो कौम मिटा दी जाती है अगर ज़िंदा रहना चाहते हो तो अपनी तारीख को पढ़िए और उसको पूरी दुनिया के सामने लाईए। इज़्ज़त देने के नाम पर , मॉडर्न एजुकेशन (Modern Education) के नाम पर, को-एजुकेशन(Co-education) के नाम पर जो टेक्निकल(Technical) धोखा हमें दिया जा रहा है उ...

आठ-आठ बार हज करने वाले और बार बार ज़ियारत व उमरह करने वाले और ख़ुद को अलहाज लिखने वाले इस पैगा़म को ज़रूर पढ़ें

 🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 आठ-आठ बार हज करने वाले और बार बार ज़ियारत व उमरह करने वाले और ख़ुद को अलहाज लिखने वाले इस पैगा़म को ज़रूर पढ़ें 🥀* ✏️ एक नौ साल का बच्चा मस्जिद के कोने में छोटी बहन के साथ बैठा हाथ उठाकर अल्लाह पाक से न जाने क्या माँग रहा था । कपड़ों में पेवन्द लगा था मगर निहायत साफ़ थे। उसके नन्हे- नन्हे से गाल आँसुओं से भीग चुके थे  कई लोग उसकी तरफ़ मुतवज्जेह थे। और वह बिलकुल बेख़बर अल्लाह पाक से बातों में लगा हुआ था। जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़कर उसका नन्हा सा हाथ पकड़ा और पूछा अल्लाह पाक से क्या मांग रहे थे ?  उसने कहा कि मेरे अब्बू मर गए हैं। उनके लिए जन्नत  मेरी अम्मी हर वक्त रोती रहती हैं उनके लिए सब्र मेरी बहन माँ से कपड़े माँगती है उसके लिए रक़म अजनबी ने सवाल किया क्या स्कूल जाते हो?  हाँ जाता हूँ किस क्लास में पढ़ते हो?  नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता,  माँ चने बना देती हैं वो स्कूल के बच्चों को फ़रोख़्त करता हूँ ।बहुत सारे बच्चे मुझसे चने ख़रीदते हैं  हमारा यही काम धन्दा है बच्चे का एक एक लफ़्ज़ मेरी रूह में उतर रहा था। तुम्हार...

ख़िदमात_ए_आलाहज़रत​

 🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 ख़िदमात_ए_आलाहज़रत​ 🥀*                      ✏️ कुछ गैरों ने पूंछा आलाहज़रत को इतना क्यों मानते हो, तो बुजुर्गों ने कहा : कान खोल कर सुनलो,👇 ________ "शिर्क था जब नाज़ करना अहमद ए मुख्तार पर" "नुक्ता चीं थे लोग इल्मे सैय्यदे अबरार पर" "हर वली हर ग़ौस को बे दस्तो पा समझा गया" "या रसूलल्लाह कहने पर था फतवा शिर्क का" "कुफ्र पर इक दिन मशीयत को जलाल आ ही गया" "मेरे आक़ा की मुहब्बत का सवाल आ ही गया" "सूरतें तस्कीन की निकलीं दिले सीमाब से" "इक किरन फूटी अचानक चर्ख पर माहताब से" "उस किरन को अहले दीं अहमद रज़ा कहने लगे" "मिल्लत ए खत्मुर रुसुल का पासबां कहने लगे" "उस किरन ने राहे ईमां को मुनव्वर कर दिया" "फूल तो हैं फूल खारों को गुले तर कर दिया" "क़ौम के ईमानो हुरमत के निगहबां ज़िंदाबाद" "ज़िंदाबाद ऐ मुफ्ती ए अहमद रज़ा खां ज़िंदाबाद" "अब्रे रहमत उनकी तुरबत पर गुहरबारी करे" "हश्र तक शाने करीमी नाज़ बरदारी करे" इस द...

बहनें ऐसी क्यूं होती हैं

 🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 बहनें ऐसी क्यूं होती हैं 🥀* ✏️ सुबह सुबह चाय की दुकान पे मेरा दोस्त मेरे पास बैठा मुझे सलाम किया उसकी आंखों में आंसू थे- मेरा हाथ पकड़ा रोते हुए बोला:             "फारिस मैं आज खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा हूं-" मैं हैरान था उसकी कमर पे थपकी दी:             "अरे ऐसा क्या हो गया शेर को-" वो मुझसे नज़रें ना मिला रहा था- फिर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा- सब लोग उसकी तरफ देखने लगे मैंने उसको चुप करवाया:          "अरे पागल सब देख रहे हैं-" वो मेरे सीने से लग गया रोते हुए बोला:          "फारिस बहने ऐसी क्यूं होती हैं-" मैं सोच में गुम......          "क्या हो गया तुमको ऐसा क्यूं बोल रहे हो-" कहने लगा:          "फारिस पता है..बहन की शादी को 6 साल हो गए हैं- मैं कभी उसके घर नहीं गया ईद शबे बरात कभी भी अब्बू और अम्मी जाते हैं-" मेरी बीवी एक दिन मुझसे कहने लगी:             "आपकी बहन जब...