हिन्दू लड़के लड़की से निक़ाह नहीं

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🥀 हिन्दू लड़के लड़की से निक़ाह नहीं 🥀* 



✏️ यक़ीनन ज़िना गुनाहे अजीम (बडा) और बहुत बड़ी बला है! यह इन्सान की दुनिया और आखिरत को तबाह व बर्बाद कर देता है!

वह नौजवान लड़कियाँ और लड़के जो हिन्दू की लड़कियों से लड़कों से नाज़ाइज़ ताल्लुक़ात रखते/ रखती है! और यह समझते है के यह कोई गुनाह नही इसलिये के वह हिन्दू है! यह सख़्त जेहालत है! हिन्दू लड़की लड़के से मुबाशरत सोहबत भी ज़िना ही कहलाएगी!

 👥इसी तरह काफीर, (नास्तीक)मजुसी, बुत परस्त, सितारा परस्त, उन से निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना मे ही शुमार होंगा! जिना किसे कहते है निचे दर्ज़ तहरीर में मुलाहिजा फ़रमाये

🚻कोई भी मर्द (Male)किसी भी ऐसी औरत से सोहबत *संभोग* करे जिसका वह मालिक नही, (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) या कोई भी औरत (Female)किसी ऐसे मर्द से मुबाशरत करे जीस की वह जौजीयत मे ना हो (यानी उस से निकाह नही हुआ हो) उसे ज़िना कहते है। जिना करने वाले मर्द को जिनाकार कहते है! और जिना करने वाली औरत को जानीयॉ कहते है! चाहे मर्द और औरत दोनो राज़ी हो! चाहे इस मे (नाजाइज जिस्मानी रिश्ता बनाने मे) पहल कोई मर्द करे या औरत! इसी तरह पेशा करने वाली बाज़ारी औरतों (Call Girl) और तवाएफ़ो के साथ भी मुबाशरत (सोहबत) करने को भी ज़िना ही कहा जाएगा।निज़ा करने का अज़ाब भी निचे दर्ज़ है मुलाहिजा फ़रमाये

✏️रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ईरशाद फ़रमाते हैं सातों आसमान और सातों जमीन और पहाड़ (उम्र दराज) ज़िनाकार पर लानत भेजते है और क़ियामत के दिन ज़िनाकार मर्द व औरत की शर्मगाह से इस कद्र बदबू आती होगी के ज़हन्नम मे जलने वालों को भी उस (बदबु) से तकलीफ़ पहुँचेगी! एक और हदीस में फ़रमाते है मोमिन होते हुए तो कोई ज़िना कर ही नही सकता"! अल्लाहु अकबर

✏️एक और हदीस में है ज़िना करने वाले शादी शुदा है तो खुले मैदान में संगसार किया जाए! (यानी पत्थरों से मार-मार कर जान से खत्म कर दिया जाए!) और गै़र शादी शुदा हो तो सौ (100) दुर्रे (कोडे, चाबुक)मारे जाए

👉 यह तमाम सज़ाए तो आख़िरत मे मिलेगी लेकिन ज़िना करने वाले पर शरीअ़त ने दुनिया में भी सज़ा मुक़र्रर की है। इस्लामी हुकूमत हो तो बादशाहे वक्त़ या फिर क़ाज़ी शरअ पर ज़रूरी है कि जानी (ज़िना करने वाले ) पर जुर्म साबित हो जाने पर शरीअ़त के हुक़्म के तहत सजा दे! हदीसे पाक में है कि अगर किसी को दुनिया में सज़ा न मिल सकी (सजा से बच गया) तो आख़िरत मे उस को सख़्त अज़ाब़ दिया जाएगा, और अगर दुनिया में सज़ा मिल गई तो फिर अल्लाह चाहे तो उसे मुआ़फ फरमा दे।

*(📚बुखारी शरीफ, जिल्द 3, बाब 968, 980)*
 *(📚बहारे शरीअ़त, जिल्द 1 हिस्सा 9 सफह 43,)*



👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नूरुद्दीन जंगी और नबी ‎ﷺ ‏का जिस्म मुबारक चोरी करने वाले ‎

आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान रदिअल्लाहु तआला अन्हु पर पीएचडी (PHD) करने वाले कुछ लोगों के नाम