राबिया बसरी
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*🥀 राबिया बसरी 🥀*
✏️ *हज़रत राबिर बसरी*
*के वालिद माजिद एक गरीब शख्स थे। उनकी तीन बेटियाँ और भी थीं। और हज़रत राबिया बसरी चौथी बेटी थीं और उनको राबिया इसलिए कहते हैं के राबिया का मानी चौथी औरत के हैं।*
*जिस रात हज़रत राबिया पैदा हुई उसी रात उनके वालिद के घर में खर्च करने को कुछ ना था वो उसी फिक्र में सो गए के रात को हुज़ूर सरवरे आलम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम की ख़्वाब में ज़ियारत हुई और हुज़र ने फ़रमाया तुम गमगीन मत हो ये लड़की जो तुम्हारे हाँ पैदा हुई है बड़ी बरगजीदा और मक़बूल होगी। तुम सुबह अमीर बसरा के पास जाओ एक कागज़ पर मेरी तरफ से ये लिखकर उसे पहुँचा दो के हर रात तुम जो मुझ हुजूर ﷺ*
*पर सौ बार दुरूद भेजते हो और जुमअे की रात को चार सौ बार, ये जुमए की रात जो गुज़र गई है तुम उसमें दरूद पढ़ना भूल गए हो। उसके एवज़ में चार सौ दीनार बतौर कुफ्फारा इस शख्स को दे दो।*
*हज़रत राबिया के वालिद जब बैदार हुए तो रोते हुए उठे और हस्ब-उल-इर्शाद एक अर्जी लिखी। और अमीर बसरा के पास पहुँचे और एक दरबान के हाथ वो अर्जी अन्दर भेजी। अमीर वो अर्जी देखकर आलमे वन्द में आ गया और हुक्म दिया के इस शुक्राने में के हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने मुझ को याद फरमाया है। उसी वक़्त दस हज़ार दरहम फकीरों को तकसीम किए जायें और चार सौ दरहम इस बुजुर्ग शख्स को दिए जायें । जो ये पैगाम लाया है और उसको कहा जाए के वो अन्दर तशरीफ लाए ताके उसकी ज़ियारत करूं। फिर एक दम उठा और कहा मगर ये खिलाफे अदब है के मैं उसे अन्दर बुलाऊँ। मैं खुद उसकी खिदमत में हाज़िर होता हूँ और उसकी राह को अपनी दाढ़ी से साफ करता हूँ।*
✏️ *चुनाँचे अमीर बसरा खुद बाहर आये और हज़रत राबिया के वालिद के हाथ चूमे और बड़े ताज़ीम व तकरीम से उसे मसनदे शाही पर बिठाया और अर्ज़ किया आईंदा जब भी कभी कोई हाजत हो। खुदारा मुझ ही से वो ख़िदमत लिया कीजिए।*
*सबक :-*
*हज़रत राबिया बसरी रदीअल्लाहो तआला अन्हा ऐसी बरगज़ीदा और मबूल हक थीं के जिनकी खुद हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने तारीफ फरमाई और ये भी मालूम हुआ के अल्लाह के मक्बूलों के दम कदम से घर में बर्कतों और रहमतों का नज़ल होने लगता है और ये भी मालूम हुआ के हुजूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम अपनी उम्मत के हाला से आज भी बा खबर हैं और अब भी मोहताजों की मदद फरमाते हैं..!*
*और ये भी मालूम हुआ के दुरूद शरीफ पढ़ना बड़ी बर्कत व रहमत का बाइस है और हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैही वसल्लम दुरूद पढ़ने वाले को जानते हैं चाहे वो कहीं भी हो और ये भी जानते हैं उसने कितना दुरूद पढ़ा।*
*गोया हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैही वसल्लम से कोई बात भी पोशीदा नहीं।*
*फिर अगर कोई शख़्स हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैही वसल्लम के इल्म में कलाम करे तो वो किस कद्र बे इल्म है।*
*📚सच्ची हिकायत हिस्सा सोम पे.465*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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