बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब
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*🥀 बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब 🥀*
✏️ एक बार जनाब बहलूल दाना किसी नख्लिस्तान में तशरीफ रखते थे- एक ताजिर का वहां से गुज़र हुआ- वो आपके पास आया सलाम करके मुअद्दब सामने बैठ गया और इन्तिहाई अदब से गुज़ारिश की
"हुज़ूर ! तिजारत की कौन सी ऐसी जिन्स खरीदूं जिसमें बहुत नफा हो-"
जनाब बहलूल ने फ़रमाया:
"काला कपड़ा ले लो-"
ताजिर ने शुक्रिया अदा किया और उल्टे क़दमों चलता वापस चला गया- जाकर उसने इलाक़े में दस्तियाब तमाम सियाह कपड़ा खरीद लिया-
कुछ दिनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतक़ाल कर गया- मातमी लिबास के लिए सारा शहर सियाह कपड़े की तलाश में निकल खड़ा हुआ,अब कपड़ा सारा उस ताजिर के पास ज़खीरा था तो अब उसने मुंहमांगे दामों फरोख्त किया और इतना नफा कमाया जितना ज़िंदगी ना कमाया था और बहुत ही अमीर कबीर हो गया-
कुछ अरसे बाद वो घोड़े पर सवार कहीं से गुज़रा जनाब बहलूल वहां तशरीफ रखते थे- वो वहीं घोड़े पर बैठे बैठे बोला:
"ओ दीवाने ! अब की बार क्या लूं-"
हज़रते बहलूल ने फ़रमाया:
"तरबूज़ ले लो-"
वो भागा भागा गया और सारी दौलत से पूरे मुल्क से तरबूज़ खरीद लिए- एक ही हफ्ते में सब खराब हो गए और वो कौड़ी कौड़ी को मुहताज हो गया-
इसी खस्ताहाली में घूमते फिरते उसकी मुलाक़ात जनाब बहलूल से हो गई तो उसने कहा:
"ये आपने मेरे साथ क्या किया?"
तो जनाब बहलूल ने फ़रमाया:
"मैंने नहीं...तेरे लहजों और अल्फाज़ ने किया सब- जब तूने अदब से पूछा था तो मालामाल हो गया और जब गुस्ताखी की तो कंगाल हो गया-"
इसको कहते हैं
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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