पीछे इस इमाम के कहना कुफ्र है
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*🥀 पीछे इस इमाम के कहना कुफ्र है 🥀*
✏️ क़ुत्बे मदीना, हज़रते शैख ज़िआउद्दीन मदनी रहिमहुल्लाहू त'आला से नमाज़ के बारे में सवाल किया जाता के बदमज़हब वहाबी इमाम के पीछे पढ़ी जाने वाली नमाज़ हो जायेगी या नहीं?
आप फरमाते की अगर इमाम गुस्ताखे रसूल हो और मुक़्तदी को ये बात अच्छी तरह पता हो तो मेरे नज़दीक (इसके बावजूद) "पीछे इस इमाम के" कहना कुफ्र है।
ये भी फरमाया करते की हिजाज़े मुक़द्दस में नमाज़ की इमामत का मस'अला नया नहीं है बल्कि मुसलमानो पर नमाज़ की तंगी का ये चौथा दौर है।
पहला दौर वो था जब अमीरुल मोमिनीन हज़रते सय्यिदूना उस्माने गनी रदिअल्लाहो त'आला अन्हो को शहीद किया गया तो अक्सर सहाबा ने बल्वाइयो के मुक़र्रर कर्दा इमाम के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ी उस वक़्त तक की हज़रते अली का ज़ुहूर हुआ।
दुसरा दौर यज़ीद मलऊन का आया जिसने इमामे आली मक़ाम को बड़ी बेदर्दी से ज़िबह करवाया, उस वक़्त भी अक्सर सहाबा और ताबयिन ने उनके मुक़र्रर कर्दा इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने को बुरा जाना।
तीसरा दौर हज्जाज बिन युसुफ का था, वो बड़ा ज़ालिम था, रसूलुल्लाह के सहाबा को अपने सामने ज़िबह करवाने से भी गुरेज़ ना किया तो उस वक़्त भी हुकुमत के मुक़र्रर कर्दा इमामो के पीछे अक्सर ने नमाज़ ना पढ़ी।
वो लोग ना अक़ीदे के गंदे थे ना अमल के, वो ज़ालिमो और फासिक़ो के मुक़र्रर कर्दा थे और वो किसी को मज़बूर भी नहीं करते थे जो उन के पीछे नमाज़ पढ़े और जो ना पढ़े उस से किसी क़िस्म का मुवाखज़ा ना करते।
और अब ये चौथा दौर नजदीयो का है, ये आमाल के भी बुरे और अक़ीदे के भी गंदे हैं, और ये मजबूर भी करते हैं की हमारे मुक़र्रर कर्दा इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ो और जो इन के पीछे नमाज़ नहीं पढ़ते उन्हें तरह तरह से तंग करते हैं हालाँकि नमाज़ का ताल्लुक़ दिल से है, अगर किसी का दिल ही इमाम की तरफ़ से मुतमईन नहीं तो उसकी नमाज़ इमाम के पीछे कैसे हो जायेगी?
जो उनके अक़ाइद पर इत्तेला रखते हैं उनकी नमाज़ तो नहीं होगी और जिनको उनके अक़ाइद की खबर नहीं वो अल्लाह और रसूल की मुहब्बत में के ये काबा -ए- मुअज़्ज़मा और मस्जिदे नबवी शरीफ़ के इमाम हैं, इस अक़ीदत में उनके पीछे नमाज़ पढ़ लेते हैं, अल्लाह त'आला से उम्मीद है की उनकी नमाज़ें क़बूल फरमा लेगा, वही क़ादिर और क़बूल फरमाने वाला है।
*✍️ (سیدی ضیاءالدین احمد قادری رحمہ اللہ تعالی، مرتب مولانا محمد عارف ضیائی)*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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