शरायते पीर
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*🥀 शरायते पीर 🥀*
✏️ शरीयत की मुखालिफत करने वाले हमेशा ग़ैरों के लिबास में आयें ऐसा ज़रूरी नहीं है बल्कि अब तो ज़माना इस क़दर फितना परवर हो चुका है कि यहां सुन्नी बनने और कहलवाने वाले ही दीन की मुखालिफत में सर गर्म हैं,और अवाम ऐसे भेड़ियों को पहचानने में कोताही बरत रही है इसी का नतीजा है कि कोई भी ऐरा गैरा नत्तू खैरा पीर बनके सुन्नियों की रहबरी करने लग जाता है और हमारी जाहिल अवाम उसके पीछे चल देती है,ये एक अज़ीम सानेह है कि जिसका चेहरा तक सुन्नियत की पहचान नहीं है लोग उसको पीर बनाये बैठे हैं हालांकि पीर होने की कुछ शरायतें हैं आईये पहले पीर की शरायत फिर दाढ़ी का मसअला समझते हैं
*फुक़्हा* पीर के अन्दर 4 शर्तें होनी चाहिये और जिसके अन्दर ये 4 शर्तें पाई जायेंगी वो पीरे कामिल है और अगर किसी के अन्दर 1 भी शर्त ना पाई गई तो वो पीर नहीं बल्कि शैतान का मसखरा है
1. सुन्नी सहीयुल अक़ीदा हो यानि कि सुन्नियत पर सख्ती से क़ायम हो हर तरह की गुमराही व बद अमली से दूर रहे तमाम बद मज़हब फ़िर्कों से दूर रहे उनके साथ उठना बैठना,खाना पीना,सलाम कलाम,रिश्ता नाता,कुछ ना रखे ना उनके साथ नमाज़ पढ़े ना उनके पीछे नमाज़ पढ़े और ना उनकी जनाज़े की नमाज़ पढ़े
2. आलिम हो यानि कि अक़ायद व गुस्ल तहारत नमाज़ रोज़ा व ज़रुरत के तमाम मसायल का पूरा इल्म रखता हो और अपनी ज़रुरत के तमाम मसायल किताब से निकाल सके बग़ैर किसी की मदद के
3. फासिक ना हो यानि कि हद्दे शरह तक दाढ़ी रखे पंज वक़्ता नमाज़ी हो और हर गुनाह मस्लन झूट,ग़ीबत,चुगली,फरेब,फहश कलामी,बद नज़री,सूद,रिश्वत का लेन देन,तस्वीर साज़ी,गाने बाजे तमाशो से,ना महरम से पर्दा,गर्ज़ कि कोई भी खिलाफे शरअ काम ना करता हो
4. उसका सिलसिला नबी तक मुत्तसिल हो यानि कि जिस सिलसिले मे ये मुरीद करता हो उसके पीर की खिलाफत उसके पास हो
📚 सबा सनाबिल शरीफ,सफह 110
ये तो हुई पीर की शरायतें अब दाढ़ी रखना कैसा है और दाढ़ी कितनी होनी चाहिये उस पर भी उस रौशनी डालता चलूं
*हदीस* हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मुशरेकीन की मुखालिफत करो यानि दाढ़ियों को बढ़ाओ और मूंछों को खूब कम करो
📚 बुखारी शरीफ,जिल्द 2,सफह 875
📚 मुस्लिम शरीफ,जिल्द 1,सफह 129
📚 तिर्मिज़ी शरीफ,जिल्द 2,सफह 105
*फुक़्हा* तमाम सुन्नतों में दाढ़ी 1 मुश्त तक बढ़ाने की सुन्नत इतनी क़वी है कि उल्माये किराम इसको वाजिब कहते हैं
📚 अशअतुल लमआत,जिल्द 1,सफह 212
*फुक़्हा* दाढ़ी बढ़ाना तमाम नबियों की सुन्नत है इसे मुंडाना या 1 मुश्त से कम करना हराम है
📚 बहारे शरीयत,हिस्सा 16,सफह 197
*फुक़्हा* दाढ़ी जबकि 1 मुश्त से कम हो तो उसे काटना किसी इमाम यानि हनफी,शाफई,मालिकी व हम्बली के नज़दीक जायज़ नहीं है और पूरी तरह से मूंड देना तो मुखन्नस यानि हिजड़ों का और हिंदुस्तान के यहूदी और ईरान के मजूसियों का तरीक़ा है
📚 दुर्रे मुख़्तार,जिल्द 2,सफह 116
📚 बहरूर राईक़,जिल्द 2,सफह 280
📚 फत्हुल क़दीर,जिल्द 2,सफह 270
📚 तहतावी,सफह 411
*👉 इस ज़माने में मसलके आलाहज़रत ही वो पैमाना है जिससे बड़ी आसानी से आदमी को आजमाया जा सकता है कि कौन हक़ पर है और कौन बातिल लिहाज़ा जिसे अपने ईमान की फिक्र हो वो हरगिज़ हरगिज़ इससे बाहर निकलने की कोशिश ना करे वरना दुनिया और आखिरत दोनों बर्बाद हो जायेगी,कम लफ्ज़ों में सिर्फ इतना समझ लीजिये कि नाम और सख्शियत कितनी भी बड़ी हो लेकिन अगर शरीयत की पैरवी करती ना दिखे तो लात मारकर उसे अपने आपसे दूर कर दीजिये अगर चे कोई कितना भी बड़ा अपने आपको आशिक़े रसूल कहता हो*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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