हज़रत दाता गंजबख्श अबुल हसन अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलेह
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
*🥀 हज़रत दाता गंजबख्श अबुल हसन अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलेह 🥀*
✏️ आप को हिन्दोस्तां आने का हुक्म आप के पीरो मुर्शिद ने दिया ।।
ओर कहा "हिन्दोस्तां जाओ और वहाँ जाकर दहरीयत ओर बेदीनी को खत्म करो"
यह हुक्म सुन कर आप लाहौर आये ।
ओर आखिर वक़्त तक लाहौर में रहकर ही "तिशनगाने मआरिफत "(अल्लाह तक पहुचने वाले तड़पते लोगो )की प्यास भुझा ते रहे ।
सबसे पहले जब आप हिन्दोस्तां आये तब आते से ही आप ने एक मस्जिद तामीर की । मस्जिद की तामीर करते वक्त मुफ्ती ओर आलिमो ने मस्जिद की सिम्त को को ग़लत बताया । जब मस्जिद बन कर तैयार हो गई तब वो सारे आलिम ओर मुफ्ती नमाज़ पड़ने आये नमाज़ के बाद हज़रत ने उन सब से सवाल किया की काबा किधर था सबने कहा हमारे सामने सब आलिम ओर मुफ्ती काबे को अपने सामने देख कर अपनी बात पर शर्मिंदगी उठानी पड़ी ।
हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलेह आप के मज़ार मूबारक पर चालीस दिन का चिल्ला किया ।
चिल्ले से निमट ने के बाद दाता अली हजवेरी की शान में ये शेर पड़ा 👇
गंजे बख्शे फ़ेज़े आम दर मज़हरे नूरे ख़ुदा
नाक़ीसारा पीर कामिल कामिलांरा रहनुमा ।।।
ख्वाजा ग़रीब नवाज़ के इसी शेर की वजह से आप गंज बख़्श के नाम से मशहूर हुवे ।।
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें